भारतीय संविधान भाग-2 : नागरिकता (अनुच्छेद-5 से अनुच्छेद-11 तक)

भारतीय संविधान भाग-2 : नागरिकता

कोई भी देश अपने मुल निवासियों को कुछ विशेष अधिकार देता है इन अधिकारों को ही नागरिकता कहा जाता है। भारत में एकहरी नागरिकता है। अर्थात् हम केवल देश के नागरिक है। राज्यों को नागरिक नहीं बल्की निवासी है। भारत में नागरिकता ब्रिटेन से लिया गया है।

  • भारत कि नागरिक 1950 के अधिनियम पर आधारित है नागरिकता में पहली बार संशोधन 1986 में किया गया था।
  • नागरिक होने के कारण PAN Card, Adhar Card दिया जाता है। गैर नागरिक को यह सुविधा उपलब्ध नहीं है।
  • नागरिक कि चर्चा भाग-2 में अनुच्छेद (5-11) तक है।

अनुच्छेद 5 मे क्या है?

संविधान प्रारंभ में दी गई नागरिकता अर्थात् जब संविधान बना तो उन सभी लोगों को नागरिकता दी गई। जो उस समय भारत के अंदर थे।

अनुच्छेद 6 मे क्या है?

पाकिस्तान से भारत में आये लोगों का नागरिकता किन्तु यदि वह संविधान बनने के बाद आएंगे तो नागरिकता नहीं मिलेगी।

अनुच्छेद 7 मे क्या है?

स्वतंत्रता के बाद भारत से पाकिस्तान चले गए ऐसे व्यक्ति जो संविधान बनाने से पहले लौट आए तो उन्हें नागरिकता दे दी जाएगी।

अनुच्छेद 8 मे क्या है?

विदेश भ्रमण एवं नौकरी करने पर भारत की नागरिकता समाप्त नहीं होगी।

अनुच्छेद 9 मे क्या है?

विदेशी नागरिकता लेने पर भारत कि नागरिकता समाप्त कर दी जाएगी।

अनुच्छेद 10 मे क्या है?

भारतीयों की नागरिकता बनी रहेगी तब तक जब तक कि वह कोई देश विरोधी कार्य नहीं करते।

अनुच्छेद 11 मे क्या है?

नागरिकता संबंधी कानुन संसद बनाती है यह जिम्मेदारी गृहमंत्रालय को दी गई है।

नागरिकता प्राप्त करने की विधियाँ

भारत में नागरिकता प्राप्त करने की पाँच विधियाँ है।

(1) जन्म के आधार पर भारत में जन्म लेने वाले सभी बच्चों को नागरिकता दी जाएगी, यदि उनके माता-पिता भारत के नागरिक हो

तो Ex- हम सभी।

(2) विदेश में जन्म लेने वाले बच्चों को भी नागरिकता दी जायेगी। यदि उसके माता-पिता या दोनों में से कोई एक भारत का नागरिक हो

Ex-शिखर धवन

(3) किसी विदेशी राज्य को भारत में मिला लेने पर-वहाँ के लोगों को नागरिकता दे दि जायेगी। सिक्कीम का भारत में विलय होने के बाद वहाँ के निवासी को दी गई। नागरिकता बंगला देश के परगना जिले को नागरिकता।

(4) पंजीकरण-इसी विधि द्वारा नागरिकता प्राप्त करने के लिए व्यक्ति को 5 साल लगातार भारत में रहना होगा। इस विधि द्वारा राष्ट्रमंडल देशों को नागरिकता दी जाती है।

(5) देशीकरण-वैसा व्यक्ति जो भारत के किसी एक भाषा को ही जानता हो, भारत के प्रति सकारात्मक सोच रखता है। वैज्ञानिक या कला में निपूण हो साथ ही लगातार भारत में 10 साल तक रहा हो।

Overseas नागरिकता – इसे 2005 में लक्ष्मीमल सिंधवी समिति द्वारा जोड़ा गया। ये बड़े-बड़े उद्योगपतियों को दिया जाता है। जो विदेशी नागरिकता ग्रहण कर लिए हैं। इस नागरिकता को प्राप्त करने वाला व्यक्ति बिना VISA के भारत आ सकता है।

Note –

  • देश विरोधी काम करने या पागल हो जाने या दुसरे राष्ट्र के प्रभाव में आ जाने पर गृह मंत्रालय द्वारा नागरिकता समाप्त कि जा सकती है।
  • VISA– किसी दुसरे देश में जाने के लिए अनुमति की आवश्यकता होती है। इस अनुमति को ही VISA कहते हैं। बिना VISA किसी दुसरे देश में प्रवेश नहीं कर सकते।
  • PASSPORT– अपने देश को छोड़कर दुसरे देश में जाने के लिए खुद अपने देश से अनुमती लेनी पड़ती है। जिसे Passport कहते हैं।
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दोस्तों इस पोस्ट मे लिखी गई सभी जानकारी खान सर के ऑफलाइन क्लास नोट्स पर आधारित है, जिसे खुद खान सर ने लिए है ।
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